धनुर्धर जाति

Regionalism of Dhanuk-धानुक समाज का क्षेत्रवाद

धानुक समाज के संगठनो के साथ साथ लोगो में भी क्षेत्रवाद हावी हो रहा है कुछ लोगो को यह बात नागवार गुजरी। लेकिन इसके ऊपर पुरे तथ्य है जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है।

लोगों ने “क्षेत्रवाद” को सिर्फ भौगोलिक दृष्टि से देखा यह भी एक सत्य है लेकिन कुछ लोगो ने इसको दूसरे तरीके से लिया। लेकिन मेरा संगठन बोलना भी कई लोगो को नागवार गुजरा उन्हें लगा शायद मैंने यह उनके लिए बोला है। दिक्कत यही है जो हम समझ नहीं पाते हमारे अंदर या तो समझ की कमी है या इन बातो को हम देखना नहीं चाहते है या फिर हमें व्यक्ति विशेष से परेशानी है जिसकी वजह से हम बिना वजह इन बातो पर गहराई से सोचने/विचार के बजाय बिना वजह अपने ऊपर बोली गयी बात समझ बैठते है। मान लीजिये अगर आपके ऊपर बोली भी गयी हो तो क्या आपका नाम लिया नहीं तो आप यह सुनिश्चित नहीं कर नहीं कह सकते है कि कोई भी बात जो आपको लगता है कि आपके बारे में ही कही गयी हो तो समझिए कि यही अहं है जिसके बारे में हम सबको काम करने की आवश्यकता है हमें लगता है यह अहं नहीं है लेकिन यह है, कही ना कही आप अपने सामने किसी दूसरे को सुनना नहीं चाहते है आप यह मान बैठे है की आप जैसा सही कोई नहीं है।

मेरे क्षेत्रवाद कहने के पीछे निम्नलिखित कारण है:
१) लोग संगठनों में अपने रिश्तेदारों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाते है जिससे दूसरे क्षेत्र के अच्छे लोग वंचित हो जाते है।
२) लोग आपस में मैथिल, मगधी, अंग, सीमांचल वाले इत्यादि कह कर एक दूसरे में विभेद पैदा कर रहे है।
३) लोग मगहिया, मैथिल इत्यादि कहकर बांटने पर लगे हुए है।
४) कुर्मी को अपना भाई कह कर धानुक में विभेद पैदा कर रहे है। धानुक कुर्मी भाई भाई है तो आज भी बिहार के कुछ इलाकों में धानुक अपने आपको धानुक नहीं कह सकते है। धानुक कुर्मी में शादी विवाह होने का मतलब यह नहीं की दोनों एक ही जाति है अगर ऐसा होता तो बिहार में सरकार दोनों जातियों को एक ही वर्ग में रखती। मैं सिर्फ तथ्य बयां कर रहा हूँ यही सत्य है।
५) धानुक के लोग आपस में भाषाई आधार पर भी बांटने पर लगे हुए है जैसे मैथिल, मगही, अंगिका, बज्जिका वाले आदि।
६) गंगा के इस पार गंगा के उस पार वाले धानुक इत्यादि।
७) आप धानुक के किस वर्ग से आते है जैसे मगहिया, चिरोट आदि।
८) आप किस गोत्र से आते है अगर आप काश्यप से आते है तो आपका वर्ण अच्छा है।
९) आपके साथ सवर्ण बैठते है शर्तिया आप बहुत ही पढ़े लिखे होंगे या समझदार होंगे, बांकी लोग या तो समझदार नहीं है या वे गरीब है।
१०) पूर्वी बिहार का धानुक, उत्तर बिहार का धानुक, मध्य बिहार का धानुक इत्यादि।
धन्यवाद
शशि धर कुमार

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“राम जी के पांच बाप थे”

- नॉन बायोलॉजिकल का छोटा भाई

लेख - १६
दिनांक: २९ अक्टूबर २०२६
शीर्षक: "भविष्य के सामाजिक नेतृत्व का निर्माण"
मैं ऐसे लेख की श्रृंखला लेकर आ रहा हूँ जो 'धानुक समाज के नाम आत्ममंथन' के नाम से होगी। पढ़ने के लिए मुझे फॉलो करें। #शशिधरकुमार #धानुकजाति #धानुकसमाज #धानुक #Dhanuk #dhanuksamaj #धानुक_जाति

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