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How to women get financially independent?

नया कारोबार शुरू करने की खातिर सही प्लानिंग और सही फाइनेंस होना जरूरी है। लेकिन, जब महिलाओं के नए कारोबार शुरू करने की बात आती है तो उन्हें कारोबार के साथ घर-बार का भी ख्याल रखना पड़ता है। ऐसे में कारोबारी महिलाओं की खातिर बिजनेस प्लानिंग और फाइनेंस प्लानिंग दूसरों के मुकाबले थोड़ा अलग हो जाती है। तो महिलाएं कैसे शुरू करें कारोबार? कैसे करें नए कारोबार की प्लानिंग? और कारोबारी महिलाओं के लिए कैसी हो फाइनेंशियल प्लानिंग? आइये जानते हैं:

  1. कैसी हो फाइनेंशियल प्लानिंग?
    • कारोबार के साथ परिवार का वित्तीय खर्च भी देखें।
    • खर्च करने के साथ पैसे बचाने पर भी फोकस करें।
    • मनी डायरी रखें, इससे खर्च पर नजर रख पाएंगी।
    • क्रेडिट कार्ड का गैर-जरूरी इस्तेमाल करने से बचें।
    • कारोबार के साथ निजी खर्च में बैलेंस बनाएं।
  2. कैसे मिलेगा बिजनेस लोन?
    • बिजनेस लोन के लिए अच्छा क्रेडिट स्कोर जरूरी है।
    • समय पर बिल भरें, वित्तीय जिम्मेदारियों को निभाएं।
    • कारोबार के लिए अनसिक्योर्ड लोन लेने से बचें।
    • क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर लगाम लगाएं।
    • क्रेडिट स्कोर बेहतर करने पर फोकस करें।
  3. कहां मिलेगा बिजनेस लोन?
    • बैंक और NBFCs से बिजनेस लोन ले सकती हैं।
    • महिलाओं के लिए कई स्पेशल बिजनेस लोन स्कीम।
    • बैंकों की तरफ से दी जा रही हैं स्पेशल लोन स्कीम।
    • बैंक ऑफ बड़ौदा ने शुरू की ‘वैभव लक्ष्मी’ स्कीम।
    • विजया बैंक की ‘वी शक्ति’ भी है महिलाओं के लिए।
    • इन स्कीम में महिलाओं को मिलती है कई फायदे।
  4. खुद का ख्याल कैसे रखें?
    • कारोबार के साथ खुद का ख्याल रखना भी जरूरी।
    • खुद का ख्याल रखने के लिए इंश्योरेंस लेना अहम।
    • मेडिकल इंश्योरेंस के साथ लाइफ इंश्योरेंस भी लें।   
    • कारोबार पर ध्यान दें पर खुद का ख्याल भी रखें।
  5. इमरजेंसी फंड
    • कारोबार चाहे कोई भी हो, इसमें कुछ तय नहीं होता है।
    • अचानक खड़ी हुई जरूरत के लिए फंड होना जरूरी।
    • ऐसे में इमरजेंसी फंड बनाए रखना फायदेमंद होता है।
    • कारोबार की छोटी-बड़ी जरूरत के लिए नहीं है ये फंड।
    • ऐसे में फंड को कारोबार के लिए इस्तेमाल करने से बचें।
  6. रिटायरमेंट प्लानिंग
    • रिटायरमेंट प्लानिंग फाइनेंशियल प्लानिंग का अहम हिस्सा।
    • रिटायरमेंट की सेविंग किसी भी हाल में कारोबार में न लगाएं।
    • कारोबार के बाद रिटायरमेंट के लिए निवेश निरंतर जारी रखें।
    • रिटायरमेंट व अन्य वित्तीय लक्ष्यों के लिए भी निवेश जारी रखें।
  7. खर्च रखें अलग-अलग
    • कारोबार और निजी खर्च, दोनों को ही अलग-अलग रखें।
    • पर्सनल और बिजनेस बैंक अकाउंट अलग रखना है सही।
    • बिजनेस के लिए फंडिंग के वक्त ये प्लानिंग आती है काम।
    • कारोबार- निजी जीवन अलग-अलग रखना प्रोफेशनल है।
  8. कहां निवेश करें?
    • आपको कारोबार से काफी अच्छा मुनाफा हुआ है।
    • बैंक में रखने की बजाय लिक्विड फंड में निवेश करें।
    • पारंपरिक योजनाओं के मुकाबले मिलेगा अच्छा रिटर्न।
    • निवेश से मिली एकस्ट्रा इनकम अन्य जरूरतों के लिए।
  9. कैसा हो पोर्टफोलियो?
    • अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना जरूरी।
    • इक्विटी, म्यूचुअल फंड, PPF में निवेश जरूर करें।
    • निवेश में विविधता जोखिम कम करने में मददगार।
    • पारंपरिक बचत योजनाओं में निवेश फायदेमंद नहीं।
  10. फाइनेंशियल प्लानर कितना जरूरी?
    • फाइनेंशियल प्लानिंग की खातिर प्लानर बेहद जरूरी।
    • लक्ष्यों की खातिर बेहतर प्लानिंग करने में करेगा मदद।
    • फाइनेंशियल प्लानर खर्च-निवेश को लेकर करेगा गाइड।
    • प्लानर की मदद से वित्तीय प्रबंधन करना होगा आसान।
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Social Awareness

सामाजिक चेतना और इसमें शिक्षा का महत्त्व

हम लोग समाज का अर्थ समझते हैं – नारी और पुरुषों का समूह। समाज का वास्तविक अर्थ यह नहीं है। इसका सही अर्थ है- एक साथ मिलकर चलना। कभी-कभार हम बस, ट्रेन और ट्राम में एक साथ यात्रा करते हैं, पर ऐसी गति को समाज नहीं कह सकते हैं। जब लोग सामूहिक आदर्श से प्रभावित होकर उस आदर्श की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ते हैं, तो वही समाज कहलाता है। सामाजिक प्रगति का अर्थ होता है, एक साथ चलते हुए आपसी एकता को मजबूत बनाना। सामाजिक जागरूकता कैसे पैदा की जा सकती है? सामाजिक चेतना जब एक विशेष आदर्श से प्रभावित होती है और लोगों में उस आदर्श के कारण एक नवजागरण पैदा होता है, तभी सामाजिक जागरूकता संभव है। यह बात कई तत्वों पर निर्भर करती है। सबसे महत्वपूर्ण तत्व है, एक महान व्यक्तित्व का नेतृत्व। इसके लिए जरूरत है एक महान व आदर्शवान व्यक्तित्व की। जब तक इसकी कमी रहेगी, तब तक सुंदर और मजबूत समाज का निर्माण नहीं हो सकता, सामाजिक परिवर्तन की बात तो दूर ही रही।

समाज को सही पथ पर आगे बढ़ाने के लिए दो बातों का होना अत्यंत जरूरी है- एक महान आदर्श और एक महान व्यक्तित्व। सामाजिक चेतना का बीज एक साथ चलने और चिंतन करने में है। जहां ऐसे मंत्र नहीं हैं, वहां कोई आदर्श नहीं है और जहां कोई आदर्श नहीं है, वहां जीवन लक्ष्यविहीन है। मनुष्य की अभिव्यक्तियां और चलने की राह भी अनेक है। कुल मिलाकर, मनुष्य की विभिन्न अभिव्यक्तियां ही संस्कृति है। एक समूह के व्यक्ति के साथ दूसरे समूह के व्यक्ति की अभिव्यक्ति के तरीके में भिन्नता हो सकती है। जैसे एक समूह के व्यक्ति अपने हाथों से खाते हैं, तो दूसरे समूह के व्यक्ति चम्मच से खाते हैं, किंतु सबकी संस्कृति एक ही है। इसलिए मानव समाज की संस्कृति एक और अविभाज्य है। बौद्धिक विकास के साथ मनुष्य की अभिव्यक्तियों में वृद्धि की संभावना है।

समाज के आर्थिक, सांस्कृतिक, धार्मिक व राजनीतिक कलेवर होते हैं। इस कारण उनमें अनेक विसंगतियां भी दृष्टिगत होती हैं। विसंगतिया पैदा करने वाले तत्व सदैव यही प्रयास करते हैं कि उन्हें कायम रखा जाए, लेकिन शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जो सामाजिक विसंगतियों व समस्याओं को दूर कर सकता है। साथ ही मनुष्य में सामाजिक चेतना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है।

सामाजिक विसंगतियों एवं उनके कारणों को दूर करने में शिक्षा की भूमिका कि वजह से समाज में कला, संस्कृति व साहित्य के उत्थान के अवसर तलाशे जा सकते हैं। शिक्षित समाज से ही प्रशासनिक, राजनैतिक व आर्थिक स्थित मजबूत होती है।

यदि व्यक्ति अपने इन्द्रियों पर नियंत्रण कर ले तो सामाजिक विसंगतियां स्वत: ही दूर हो जाएंगी। वास्तव में विसंगतियों की जननी मनुष्य की कामनाएं होती है। ऐसे में शिक्षा के प्रकाश से ऐसी कामनाओं पर विराम लगता है और व्यक्ति समाज व देश हित में सोचता है, इसलिए व्यक्ति के निर्माण में शिक्षा की अहम भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता।

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