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हमारे युवाओं की सबसे बड़ी जरूरत क्या है? | शिक्षा, कौशल और रोजगार
किसी भी जाति या समाज का भविष्य उसके युवाओं से जुड़ा होता है। युवा केवल संख्या नहीं होते—वे आने वाले समय के शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी, उद्यमी, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता और नेतृत्वकर्ता होते हैं। फिर सवाल उठता है—क्या हम अपने युवाओं के भविष्य पर उतनी गंभीरता से...
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समाज का विकास केवल चुनाव से नहीं होता | शिक्षा, युवा और आर्थिक विकास
राजनीति समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोकतंत्र में राजनीतिक भागीदारी, प्रतिनिधित्व और अपने अधिकारों की समझ जरूरी है। इसलिए धानुक जाति के लोगों का राजनीति में रुचि लेना स्वाभाविक है। लेकिन एक सवाल हमें अपने आप से जरूर पूछना चाहिए—क्या किसी जाति की प्रगति का पैमाना केवल...
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राजनीति पर घंटों बहस, शिक्षा पर कुछ मिनट क्यों? | सामाजिक चिंतन
किसी भी समाज के लिए राजनीतिक जागरूकता जरूरी है। अपने अधिकारों, नीतियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझना नागरिक चेतना का हिस्सा है। लेकिन एक सवाल धानुक जाति के हर संगठन और समूह को खुद से पूछना चाहिए—क्या हमारी राजनीतिक चर्चा हमारे सामाजिक विकास की चर्चा से बड़ी...
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डॉ. राममनोहर लोहिया के विचार: गरीब, पिछड़े वर्ग और सामाजिक न्याय
डॉ. राममनोहर लोहिया: गरीब-गुरबों की आवाज़ और सामाजिक न्याय का अधूरा सपना जाति, गरीबी और अवसरों की असमानता के विरुद्ध लोहिया के विचार आज भी क्यों प्रासंगिक हैं? गांधी और विनोबा की विचारधारा से संवाद तथा धानुक जाति के नवजागरण के लिए उनके संदेश। जिस देश में...
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ग्रुप बहुत हैं, संवाद कहाँ है? समाज का आत्ममंथन
आज धानुक जाति के नाम से अनेक WhatsApp और Facebook समूह दिखाई देते हैं। कहीं संगठन की चर्चा है, कहीं सामाजिक गतिविधियों की, कहीं राजनीति की। यह अच्छी बात है कि लोग जुड़ रहे हैं। लेकिन एक सवाल बार-बार मन में आता है—क्या हम वास्तव में जुड़...
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पढ़ना शुरू कीजिए: अपनी सोच की चाबी किसी और के हाथ में मत दीजिए | धानुक जाति
आज हमारे पास जानकारी की कमी नहीं है। मोबाइल फोन खोलते ही दुनिया हमारे सामने होती है। WhatsApp, Facebook, YouTube और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हर मिनट हजारों संदेश, वीडियो और पोस्ट हमारे सामने आते हैं। लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल हमें स्वयं से पूछना चाहिए— क्या...
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हूल दिवस – क्या भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का पहला अध्याय थी?
इतिहास केवल राजाओं, सेनाओं और साम्राज्यों का नहीं होता; इतिहास उन लोगों का भी होता है जिनके हाथों में तलवार नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी बचाने का संकल्प होता है। हर वर्ष 30 जून को भारत के पूर्वी राज्यों—विशेषकर झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा—में हूल दिवस मनाया...
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धानुक समाज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक चेतना – ‘मैंनपुरी की लोक सांस्कृतिक विरासत’ के संदर्भ में
भारतीय समाज की सांस्कृतिक संरचना केवल राजाओं, साम्राज्यों और दरबारी इतिहास से निर्मित नहीं हुई, बल्कि उन लोकसमुदायों ने भी इसे आकार दिया जिन्होंने सदियों तक श्रम, लोकगीत, कृषि, परंपराओं और सामाजिक जीवन को जीवित रखा। धानुक समाज ऐसा ही एक महत्वपूर्ण समुदाय है, जिसकी भूमिका भारतीय...
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लोकनायक कर्पुरी ठाकुर
लोकनायक कर्पुरी ठाकुर जी की जयंती 24 जनवरी को मनाया जाता है इस बार यह जयंती इसीलिए ख़ास हो जाता है क्योंकि इस वर्ष उनकी सौवीं जयंती मनाई गयी और साथ में इसी वर्ष उन्हें भारत सरकार ने मरणोपरांत उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा की है।...
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Dhanuk Samaj and Politicians
मैं हमेशा लिखता रहा हूँ की बिना राजनीती के हम अपने समाज के उत्थान के लिए किसी भी तरह का नीति नहीं बना सकते है और क्यों हमें अपने समाज के राजनेताओं से दूर रहना चाहिए इसके पीछे कई कारण है। हमारी जाती के लोग अपने जाति...
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Who is responsible – जिम्मेदार कौन?
हमारे धानुक समाज के संगठन पटना, नालंदा और मिथिला के अलावा किसी और जिले के बारे में नहीं सोच पा रहे है। आजकल इसी क्षेत्र में कुछ ज्यादा ही तितलियों के उड़ने की ख़बरें आ रही है जो दो काम करती है एक तो हवा में ध्वनि...
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Society Upliftment Process – समाज कैसे आगे बढ़े
मैं कुछ सालों से धानुक समाज के लोगो या उससे जुड़े संगठनों से मिल रहा हूँ लेकिन दुर्भाग्य कहिए या भेड़चाल हमें कहीं भी समाज को ऊपर उठाने के लिए किसी भी तरीके का कोई ब्लूप्रिंट नजर नही आ रहा है। मैंने अपनी तरफ से कई सालों...
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